माता-पिता के लिये (#8326)

देखता है तू, हे स्वामी ! तेरी अनुकम्पा और कृपा के लिये आकाश की ओर फैले मेरे याचना भरे हाथों को। वर दे कि ये तेरी उदारता और कृपा से परिपूर्ण सहायता के बहुमूल्य रत्नों से भर जायें। मुझे और मेरे माता-पिता को क्षमादान दे और मैंने तेरे आशीष और तेरी दिव्य उदारता के महासागर से जो कुछ भी पाना चाहा है, उनसे इन्हें भर दे। मेरे हृदय के प्रिय ईश्वर, अपनी राह में अर्पित मेरे सभी कर्म स्वीकार कर। सत्य ही, तू सर्वशक्तिशाली, सर्वोच्च, अतुलनीय, एकमेव है। सत्य ही, तू एक, एकाकी, क्षमादाता, करूणामय है।

-Bahá'u'lláh
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माता-पिता के लिये (#8328)

महिमा हो तेरी, हे ईश्वर, मेरे स्वामी! मैं तुझसे याचना करता हूँ कि क्षमा कर दे मुझे और उन्हें, जो तेरे धर्म के समर्थक हैं। वस्तुतः, तू सर्वसमर्थ स्वामी, क्षमादाता, सर्वाधिक उदार है। अपने वैसे सेवकों को, जो ज्ञानविहीन हैं, अपने धर्म को स्वीकार करने के योग्य बना, क्योंकि एक बार यदि वे तेरे बारे में जान जायेंगे तो वे न्याय दिवस की सत्यता के साक्षी बनेंगे और तेरी कृपा के प्रकटीकरण का विरोध नहीं करेंगे। उनके लिये अपनी दया के चिन्ह भेज और वे जहाँ कहीं भी निवास करें उन्हें अपनी उदारता का अंशदान दे, जिसका विधान तूने उनके लिये किया है जो तेरे सेवकों के बीच विशुद्ध हृदय हैं। तू सत्य ही सर्वोपरि सम्राट, सर्वकृपालु, परम करुणामय है। अपनी कृपा और अपने आशीषों की बूंदें बरसने दे वहाँ जिनके निवासियों ने तेरे धर्म को अपनाया है। वस्तुतः, क्षमादान देने में तू सर्वोपरि है। यदि तेरी कृपा उन तक नहीं पहुँच पायेगी तो तेरे इस दिवस में वे तेरे भक्तों में कैसे गिने जायेंगे। मुझे आशीष दे, हे मेरे ईश्वर! और उन्हें भी जो इस पूर्व निर्धारित दिवस में तेरे चिन्हों पर विश्वास करेंगे! जो अपने हृदयों में तेरा प्रेम धारण करते हैं, ऐसा प्रेम जिसे तूने ही उन्हें दिया है, सत्य ही, तू न्याय का स्वामी, सर्वोच्च है!

-The Báb
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माता-पिता के लिये (#8324)

हे स्वामी! इस सर्वमहान धर्मकाल में माता-पिता की ओर से संतानों द्वारा की गई प्रार्थना को तू स्वीकार करता हैं। यह इस धर्मकाल के विशेष अनन्त आशीषों में एक है। अतः, हे कृपालु स्वामी! अपनी एकमेवता की देहरी पर अपने इस सेवक की विनती स्वीकार कर और अपनी अनुकम्पा के महासागर में इसके पिता को निमग्न कर दे, क्योंकि यह पुत्र तेरी सेवा करने के लिये उठ खड़ा हुआ है और तेरे प्रेम के पथ पर प्रति क्षण प्रयत्नशील है। सत्य ही, तू दाता, क्षमादाता और कृपालु है।

-`Abdu'l-Bahá
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